जीवन

सफलता की सच्ची कहानी: जॉनी लीवर

कहानी सफलता की 

मेरे ख़्याल में हम सब जॉनी लीवर को जानते हैं। जॉनी लीवर वह नाम है जो करोड़ों भारतीयों को हँसाता है किसी भी फ़िल्म में उसकी मौजुदगी लोगों को हँसाती है और उनके किरदार ने उन्हें कई पुरस्कार दिलाए हैं। हर कोई उन्हें फ़िल्म के पर्दे पर देखना चाहता है। लेकिन बस कुछ लोग ही जानते हैं कि उनका बचपन काफ़ी कठिनाइयों में बीता।

जॉनी लीवर की बचपन की कहानी

सिर्फ़ 10 साल की उम्र में ही जॉनी लीवर कार्यक्रमों में स्टेज पर डांस किया करते थे और घर ख़र्च चलाने के लिए एक शराब की दुकान पर काम किया करते थे। वहाँ वह चने बेचते थे। वहाँ से पैसे कमा कर घर में देने के बाद वह अगले दिन स्कूल जाते थे। “बहुत ही कम उम्र में मुझे पैसे कमा कर घर पर देने होते थे और घर में चुल्हा मेरे बदौलत ही जलता था। साथ ही मैं स्कूल भी जाता था, आप ही सोचिए मैं अपनी पढ़ाई पर कैसै फ़ोकस करता? मैं सिर्फ़ सातवीं क्लास तक ही पढ़ पाया। उसके बाद ज़िंदगी के गुज़ारे के लिए मैं अलग-अलग जगह पर काम करता। मैं ट्रेन में और रास्तों पर छोटी-मोटी चीज़े बेचा करता, जैसे नींबू-पानी, बादाम वगैरह”, जॉनी ने बचपन के उन कठिन दिनों को याद कर के कहा।

हताशा और आत्महत्या की कोशिश

इन सब के साथ जॉनी हर हफ़्ते यीशु मसीह की प्रार्थना के लिए जाते थे। लेकिन वे अपने जीवन से हताश थे और उन्होंने कई बार आत्महत्या की सोची। “एक बार ऐसा करते हुए मैं चलती ट्रेन के सामने कूद गया। मैं 14 साल का था, और मेरे दिमाग़ में कई सारी चिंताएँ थी। मैं रेल ट्रैक पर ट्रेन की तरफ चला जा रहा था, ट्रेन मेरी तरफ़ तेज़ी से आ रही थी और अचानक मेरे दिमाग़ में मेरी 3 बहनों का ख़्याल आया कि मेरे मरने के बाद उनका क्या होगा, क्योंकि मैं उनसे उम्र में बड़ा था और पता नहीं कैसे मैं ट्रेन के सामने से हट गया “, जॉनी ने कहा।

जॉनी की लोकप्रियता, बॉलीवुड और सफलता

लोगों को हँसाने की क़ाबीलियत को लेकर वह अपने जीवन में आगे बढ़ते गए। “मैं ‘हिन्दुस्तान लीवर’ नामक कंपनी में काम करता था और वहाँ अपने ऑफ़िसर्स की नकल करता जैसा अपने स्कूल में मैं अपने टीचर्स की नकल करता था। यहीं से मेरा नाम जॉनी लीवर पड़ गया”, जॉनी ने कहा। उनकी कलाकारी ने उन्हें लोकप्रिय बनाया, वह स्टेज शोज़ करने लगे और उन्हें बॉलीवुड की फ़िल्मों में मौका मिलने लगा। उन्होंने कहा, “जब ईश्वर आपके साथ होता है तो वो आपको सब कुछ देता है। मैं बस्ती में पला-बड़ा हूँ और मेरे सारे किरदार उन लोगों से लिए गए हैं जिन्हें मैंनें अपने आस-पास देखा। इन सब के बग़ैर मैं कभी इतना अच्छा कलाकार नहीं बन पाता।”

जीवन का अकेलापन और बेटे की बीमारी

नाम, सफ़लता और पैसा जॉनी के सिर चढ़ कर बोलने लगा। वह अपनी सफ़लता में अपनी जड़ों को भूलने लगे और ईश्वर से दूर होते गए। परिवार के साथ भी उनके संबंध ख़राब होने लगे। जीवन के अकेलेपन को उन्होंने अपने सफ़लता की चकाचौंध में छुपाना चाहा। लेकिन उनके जीवन को एक बड़ा धक्का लगने वाला था। उनका बेटा जेस्सी बीमार पड़ गया। जेस्सी के गले पर एक बड़ा ट्यूमर निकल आया था। जॉनी उसे हॉस्पिटल ले गए और डॉक्टर ने कहा कि इस ट्यूमर को ऑपरेशन कर के निकालना पड़ेगा। इसमें ख़तरा यह था कि बाँए हाथ को भी काटना पड़ेगा क्योंकि ऑपरेशन के दौरान उस नस को भी काटना पड़ेगा जो बाँए हाथ तक जाती है। जॉनी ने ऑपरेशन करवाने से मना किया।

सच्ची सफ़लता: एक चमत्कार, जेस्सी का स्वस्थ होना, परिवार में खुशी और जॉनी का यीशु के करीब आना

इसी बीच जॉनी ने जेस्सी का होमियोपैथिक और आयुर्वैदिक इलाज करवाया। जॉनी की पत्नी और जेस्सी की माँ सुजाता ने जेस्सी को कई बाबा और पंडितों के पास दिखाया पर कुछ भी न हुआ। अंत में जॉनी और उसका परिवार वापस यीशु के पास आए जिन्हें वे भूल चुके थे। जॉनी ने कहा, “मैंनें अपना पूरा विश्वास प्रभु यीशु मसीह पर रखा क्योंकि मैं प्रार्थना में जाने लगा और मैंनें उनके अनुग्रह को देखा है। मैं उनके सामर्थ्य को जानता हूँ। पहले मैं सिर्फ़ कहने के लिए यीशु मसीह को मानता था लेकिन जब मैंनें निजी ज़िन्दग़ी में उन्हें अनुभव किया…तब मैं निश्चित था कि जेस्सी स्वस्थ हो जाएगा ।”

जॉनी और उसके परिवार ने प्रार्थनापूर्वक जेस्सी का हॉस्पिटल में ऑपरेशन करवाया और वह सफ़ल हुआ। जब जॉनी और उसकी पत्नी, जेस्सी से ऑपरेशन के बाद मिले तो जेस्सी ने अपने बाँए हाथ से उन्हें इशारा किया, वो हाथ जो कि ऑपरेशन के दौरान काटा जाने वाला था। यह ऑपरेशन परमेश्वर का एक चमत्कार था। पूरे परिवार में ख़ुशी की लहर दौड़ गई और सब एक दूसरे के क़रीब आए।

अंत में जाकर जॉनी को वह चीज़ मिली जिसकी तलाश उसे बरसों से थी- जीवन में शांति। जॉनी कहते हैं कि फिर धीरे-धीरे उनकी सारी बुरी आदतें भी दूर होती गईं। उनके अनुसार, “…लोग मुझे अच्छा इन्सान समझते हैं, पर मैं और मेरी पत्नी जानते हैं कि मेरे अन्दर क्या है। यीशु ने मेरी सारी गन्दगी धो डाली, उसने मुझे पवित्र बनाया। जीवन में मेरे सबसे बड़ा आशीर्वाद है-शांति। पहले मैं हताश, निराश रहता था, घर नहीं जाता था क्योंकि शांति नहीं थी। मेरे पास पैसा, नाम और शोहरत था पर सब बेकार…यीशु के आने के बाद मेरे जीवन में शांति है।”

आज जॉनी लीवर हर मौके पर यीशु मसीह के बारे में लोगों को बताते हैं। आज जब जॉनी लीवर हँसकर-हँसाकर लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाते हैं, उन्हें ख़ुशी देते हैं, वो जानते हैं कि सच्ची सफ़लता और ख़ुशी यीशु मसीह देते हैं।

जॉनी लीवर – सी.बी.एन. इंडिया

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Nirvi

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